🔴डुमरिया मठ की जमीन पर ‘काला खेल’ का आरोप, हाईकोर्ट तक गूंजा मामला
🔵ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। यूपी-बिहार सीमा पर स्थित प्राचीन डुमरिया मठ इन दिनों जमीन और सरकारी अभिलेखों में कथित हेराफेरी को लेकर बड़े विवाद का केंद्र बना हुआ है। धर्म, आस्था और विरासत से जुड़े इस मामले ने अब प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मठ के महंथ रूद्रानंद गिरी ने आरोप लगाया है कि गांव में कब्रिस्तान की भूमि सरकारी कागजों में मात्र 48 डिसमिल दर्ज है, लेकिन मौके पर लगभग 100 डिसमिल भूमि पर कब्जा कर लिया गया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ साधारण विवाद नहीं, बल्कि कागजों के जरिए धार्मिक संपत्तियों को धीरे-धीरे निगलने की बड़ी साजिश है।
महंथ ने साफ शब्दों में कहा कि डुमरिया मठ की जमीन के साथ वर्षों से छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर वास्तविक स्थिति को बदलने की कोशिश की गई है। यही कारण है कि उन्होंने पूरे मामले को हाईकोर्ट तक पहुंचाया, जहां फिलहाल वाद विचाराधीन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महंथ रूद्रानंद गिरी ने मंडलायुक्त गोरखपुर से मठ की ऐतिहासिक और धार्मिक प्रमाणिकता की जांच पुरातत्व विभाग से कराने की मांग की थी। मंडलायुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी कुशीनगर ने जांच के आदेश भी जारी किए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी फाइल तहसीलदार तमकुहीराज कार्यालय में ही अटकी हुई बताई जा रही है। आरोप है कि करीब तीन-चार महीने से जांच आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे मठ से जुड़े लोगों में भारी आक्रोश है।स्थानीय लोगों के बीच चर्चाआम है कि क्या कारण है कि इस संवेदनशील मामले में प्रशासनिक मशीनरी सुस्त पड़ी हुई है? मठ पक्ष का आरोप है कि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो विरोधी पक्ष कागजों में हेराफेरी कर अपने मंसूबों में सफल हो सकता है।


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