🔵झोलाछाप डाक्टरो के चंगुल में जिंदगी: मुन्ना पाली क्लिनिक में बिगड़ी महिला की हालत, अस्पताल सील🔴बिना डिग्री चल रहा था ‘हॉस्पिटल’, महिला की हालत बिगड़ी तो प्रशासन ने मारा छापा
🔵 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। पडरौना कोतवाली क्षेत्र के खिरकिया में “इलाज” के नाम पर चल रहे एक कथित अस्पताल की करतूत ने फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मुन्ना पाली क्लिनिक नाम से संचालित अस्पताल में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के हाथों इलाज कराने के बाद एक महिला जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। मामले की शिकायत पहुंची तो प्रशासनिक अमला हरकत में आया, लेकिन जांच के दौरान जो नजारा सामने आया उसने सबको चौंका दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तहसीलदार और स्वास्थ्य विभाग की टीम जब क्लिनिक पर पहुंची तो वहां न तो मानक मिले, न प्रशिक्षित चिकित्सक और न ही इलाज की वैध व्यवस्था। आरोप है कि अस्पताल संचालक तबरेज आलम जांच को प्रभावित करने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाने,बहानेबाजी करने और कार्रवाई रोकने के तमाम हथकंडे अपनाता रहा, लेकिन तहसीलदार की सख्ती के आगे उसकी एक नहीं चली। आखिरकार प्रशासन ने क्लिनिक को सील कर दिया।

जानकारी के मुताबिक बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के धनहा थाना क्षेत्र के खोतहवा गांव निवासी अर्जुन शाह अपनी पत्नी सीमा देवी का प्रसव करीब पखवाड़े पहले बिहार में कराए था। प्रसव के बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। इसी दौरान बिहार की आशा किरन देवी परिजन को बेहतर इलाज का भरोसा दिलाकर खिरकिया स्थित मुन्ना पाली क्लिनिक लेकर पहुंची।आरोप है कि वहां मौजूद कथित झोलाछाप डॉक्टर ने पीडिता सीमा देवी के अत्यधिक हो रहे रक्तस्राव के इलाज के नाम पर गर्भाशय के साथ छेडछाड किया। इसके बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल संचालकों ने न तो खतरे की गंभीरता बताई और न ही समय रहते किसी बड़े अस्पताल में रेफर किया। गलत इलाज और लापरवाही के कारण महिला की हालत नाजुक हो गई। मामला प्रशासन तक जब पहुंचा तो तहसीलदार अभिषेक मिश्रा और एमवाईसी डाॅ धीरज सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान अस्पताल में कई गंभीर खामियां मिलीं। जांच मे पाया गया कि मुन्ना पाली क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन आयुर्वेद पद्धति से है। सूत्रों के अनुसार अस्पताल संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी संतोषजनक नहीं मिले।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना मानक और बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के ऐसे अस्पताल किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं? स्थानीय लोगो का कहना है कि ग्रामीण और गरीब परिवार इलाज के नाम पर इन कथित अस्पतालों के जाल में फंसकर अपनी जान गंवाने के लिए विवश हैं।फिलहाल अस्पताल संचालक की नौटंकी व ड्रामा के वजह प्रशासन आधा-अधूरा अस्पताल सील कर आगे की कार्रवाई मे जुटी है। वहीं पीड़ित परिवार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
रिपोर्ट - संजय चाणक्य
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