🔵25 साल सेवा के बाद योग्यता पर सवाल क्यों?केंद्र से कानून बनाकर राहत देने की मांग
🔴 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर।परिषदीय विद्यालयों में वर्षों से बच्चों का भविष्य गढ़ रहे शिक्षकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। टेट की अनिवार्यता के विरोध में गुरुवार को कुशीनगर की सड़कों पर शिक्षकों का ऐसा हुजूम उमड़ा, जिसने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक बड़े सवाल को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में खड़ा कर दिया है।
बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकले विशाल पैदल मार्च में हजारों शिक्षकों ने हिस्सा लिया और सरकार से पूछा कि जिन शिक्षकों ने 20 से 25 वर्षों तक विद्यालयों में अपनी सेवाएं दीं, आखिर आज उनकी योग्यता पर सवाल क्यों खड़े किए जा रहे हैं। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के देशव्यापी आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में शिक्षकों का आक्रोश साफ दिखाई दिया। उनका कहना था कि नियुक्ति के समय उन्होंने शासन द्वारा निर्धारित सभी शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संबंधी अर्हताओं को पूरा किया था। दशकों तक बच्चों को शिक्षित करने के बाद अब टेट को अनिवार्य बनाना न केवल उनके अनुभव का अपमान है, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य पर भी संकट खड़ा कर रहा है। जुलूस के रूप में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम वैभव मिश्रा को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि केंद्र सरकार मानसून सत्र में अध्यादेश अथवा कानून लाकर कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करे।


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