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करोड़ों का भुगतान पहले, काम अब!सेवरही बिजली खंड में आखिर किसके इशारे पर हुआ 'कागजी विकास'?

  

🔵खुलासे के बाद दौड़े अफसर-ठेकेदार!जो काम फाइलों में था पूरा, उसे अब आनन-फानन मे जमीन पर उतारने कवायद शुरू, 

🔴 मीडिया के खुलासे के बाद हरकत में आया बिजली विभाग, एफएमएम कंपनी करा रही अधूरे कार्य पूरे

🔴पहले खबर में उठे थे भुगतान, ट्रांसफार्मर और OTS घोटाले के सवाल, अब शुरू हुई कोरमपूर्ति की कवायद

🔵युगान्धर टाइम्स व्यूरो 

कुशीनगर। जनपद के सेवरही विद्युत वितरण खंड में करोड़ों रुपये के  घोटाले को लेकर मीडिया द्वारा किए  गये खुलासे के बाद विभागीय हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। पूर्व में प्रकाशित खबरों में बिजनेस प्लान 2023-24 और 2024-25 के तहत ट्रांसफार्मर क्षमता वृद्धि, नए ट्रांसफार्मर स्थापना, ओटीएस योजना में कथित अनियमितताओं तथा बिना कार्य  कराये भुगतान किए जाने जैसे गंभीर आरोपों को प्रमुखता से उठाया गया था। अब उस खबर के बाद विभाग और संबंधित कंपनी एफएमएम अधूरे कार्य को आनन-फानन मे पूर्ण करने मे जुटी है। नतीजतन विभाग और कम्पनी की बढ़ी सक्रियता पूरे मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दी है।

सूत्रों के अनुसार, जिन कार्यों को विभागीय अभिलेखों में पहले ही पूर्ण दिखाया जा चुका था और जिनके सापेक्ष भुगतान भी जारी किया चुका था, उन्हीं कार्यों को एफएमएम कंपनी द्वारा अब आनन-फानन में पूरा कराया जा रहा है। क्षेत्र के कई गांवों में ट्रांसफार्मर स्थापना, लाइन विस्तार और अन्य विद्युत कार्यों को लेकर अचानक गतिविधियां बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां आज तक कभी कोई कार्य नहीं हुआ, वहां अब मजदूरों और सामग्री की आवाजाही बढ़ गई है।


🔴पहले भुगतान, फिर काम – आखिर कैसे?

बतादे कि मीडिया ने अपनी पूर्व प्रकाशित खबरों में सवाल उठाया था कि बिजनेस प्लान के तहत स्वीकृत कार्यों का भुगतान किन आधारों पर किया गया, जबकि कई स्थानों पर कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे थे। अब जब वही कार्य कराए जा रहे हैं तो यह सवाल और भी गंभीर हो गया है कि आखिर करोड़ों रुपये का भुगतान पहले किस आधार पर किया गया?यदि कार्य अधूरे थे तो भुगतान क्यों हुआ? और यदि भुगतान सही था तो अब उन्हीं कार्यों को दोबारा कराने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?यही सवाल पूरे मामले के केंद्र में है।

🔴निरीक्षण हुआ था या केवल कागजी खानापूर्ति?

नियमों के अनुसार किसी भी कार्य का भुगतान उससे संबंधित अधिकारियों के निरीक्षण, माप पुस्तिका के सत्यापन और कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के आधार पर किया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भुगतान से पहले किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर कार्य का निरीक्षण किया था?यदि निरीक्षण हुआ था तो अधूरे कार्यों पर पूर्णता का प्रमाण किसने दिया?यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो करोड़ों रुपये की धनराशि जारी कैसे हो गई?

🔴एफएमएम कंपनी की भूमिका सवालों के घेरे में

चर्चा - ए-सरेआम है कि जिस एफएमएम कंपनी को कार्य आवंटित किए गए थे, उसने बिना कार्य पूर्ण कराये ही भुगतान प्राप्त कर रफुचक्कर हो गया था। अब जब मामला सार्वजनिक हो चुका है और खबरें प्रकाशित हो रही हैं, तब कंपनी द्वारा आनन-फानन कोरमपूर्ति कार्य कराए जा रहे है जिसको लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं हैं। आम लोगो का कहना है कि अगर कंपनी ने समय से कार्य पूरे किए थे तो फिर आज इतनी हड़बड़ी क्यों है?और यदि कार्य पूरे नहीं थे तो भुगतान क्यों दिया गया?

🔴कार्रवाई के बजाय चुप्पी क्यों?

सबसे हैरानी की बात यह है कि करोड़ों रुपये के भुगतान और कार्यों की स्थिति को लेकर इतने गंभीर सवाल उठने के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। न तो किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई और न ही किसी के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से कोई विभागीय कार्रवाई दिखाई दी।ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या विभाग अपने ही अधिकारियों को बचाने में जुटा है?

🔴 सवाल पे सवाल

जानकारों का कहना है कि जब कार्य अब कराए जा रहे हैं तो विभाग भुगतान पहले किस आधार पर किया?भुगतान से पूर्व मौके का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया?कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र किसने जारी किया?बिना कार्य पूर्ण हुए भुगतान की जिम्मेदारी किसकी है?एफएमएम कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?भुगतान करने वाले अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आखिर क्यों नहीं हुई? ऐसे तमाम यक्ष प्रश्न है जो गंभीर जांच का विषय है। कहना ना होगा कि सेवरही विद्युत वितरण खंड में चल रही यह भागदौड़ केवल संयोग है या फिर मीडिया द्वारा पूर्व में उठाए गए सवालों के बाद शुरू हुई डैमेज कंट्रोल की कवायद, इसका जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि करोड़ों रुपये के भुगतान और अब कराए जा रहे कार्यों के बीच का यह विरोधाभास पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है। बडा सवाल यही है "जब काम अब हो रहा है तो करोड़ों रुपये पहले किस बात के निकाले गए?"

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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