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बेबाक लेखनी का बजा डंका… विभिन्न सम्मानों से नवाजे गए संजय चाणक्य

  

⚫ “ जागरण की पाठशाला से निकली कलम, 27 साल बाद भी कायम है संजय चाणक्य का तेवर,खबरों से बनाई पहचान ”

🔵  ग्लोबल न्यूज 

कुशीनगर। पत्रकारिता में 27 साल का सफर केवल कैलेंडर के पन्नों पर दर्ज वर्षों का हिसाब नहीं होता। यह उन अनगिनत रातों का सिलसिला होता है, जब खबर के लिए दौड़ना पड़ता है, तथ्यों की तह तक जाना पड़ता है और कई बार सवालों के जवाब तलाशते-तलाशते खुद सवालों के घेरे में आना पड़ता है। संजय चाणक्य की पत्रकारिता यात्रा भी कुछ ऐसी ही है, जहां कलम ने कभी आराम नहीं चुना और खबरो ने कभी आसान रास्ता नहीं चुना। बेबाक तेवर, निर्भीक लेखनी और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने की शैली ने कुशीनगर की पत्रकारिता में चाणक्य की अलग पहचान बनाई है। इसी सक्रियता और योगदान के लिए हाल के दिनों में विभिन्न संस्थाओं ने उन्हें कई सम्मानों से नवाजा है।

बतादे कि संजय चाणक्य ने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत वर्ष 1998 मे दैनिक जागरण से की। उस दौर में पत्रकारिता आज की तरह मोबाइल और सोशल मीडिया की रफ्तार वाली नहीं थी। खबर के लिए मौके पर पहुंचना,जानकारी जुटाना,उसकी पुष्टि करना और फिर उसे अखबार तक पहुंचाना ही पत्रकारिता का रास्ता था। इसी दौर में उन्हें दैनिक जागरण के तत्कालीन ब्यूरो चीफ दिनेश कसेरा का सानिध्य मिला। श्री कसेरा की छत्रछाया में उन्होंने पत्रकारिता का ककहरा सीखा। खबर की भाषा से लेकर तथ्य की विश्वसनीयता और जनहित के सवालों को खबर का हिस्सा बनाने तक की सीख मिली। यही वजह है कि वर्षों बाद भी संजय चाणक्य अपने पत्रकारिता गुरु के रूप में दिनेश कसेरा का नाम सम्मान के साथ लेते हैं।दैनिक जागरण के बाद करीब चार वर्षों तक उन्होंने हिन्दुस्तान में काम किया। फिर वर्ष 2007 में गोरखपुर से अमर उजाला की लांचिंग के दौरान कुशीनगर का हिस्सा बन पत्रकारिता की नई पारी शुरू की। इसके बाद लोकमत, डेली न्यूज एक्टिविटी, द पायनियर, समाज का आईना और संदेशवाहक जैसे समाचार पत्रों में  जिला संवाददाता की जिम्मेदारी संभाली। संस्थान बदलते रहे, लेकिन पत्रकारिता के प्रति उनका तेवर नहीं बदला।दूसरों के अखबार में लिखते-लिखते उन्होंने अपना अखबार खड़ा कर दिया। संजय चाणक्य की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2008 रहा, जब उन्होंने अपनी पत्रकारिता को नया आयाम देते हुए ‘युगान्धर टाइम्स’ नाम से अपना साप्ताहिक समाचार पत्र शुरू किया।यह सिर्फ एक अखबार शुरू करने की कहानी नहीं थी। यह उस दौर में अपनी सोच, अपनी खबर और अपनी पत्रकारिता को स्वतंत्र मंच देने का फैसला था। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ युगान्धर टाइम्स आज उनकी पत्रकारिता की पहचान का हिस्सा है।समय बदला, समाचार माध्यम बदले और पत्रकारिता का स्वरूप भी बदला, लेकिन चाणक्य की सक्रियता बनी रही। वर्तमान में वह युगान्धर टाइम्स के साथ आईएनए न्यूज एजेंसी और ग्लोबल न्यूज एजेंसी से भी जुड़े हुए हैं।


🔴 खबर सिर्फ खबर नहीं, सवाल भी है

संजय चाणक्य की पत्रकारिता का सबसे अलग पहलू उनका सवाल पूछने वाला तेवर है। स्थानीय समस्याओं से लेकर प्रशासनिक कामकाज, विकास योजनाओं, जनहित और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों तक उनकी खबरों में सवाल लगातार दिखाई देते हैं।उनकी पत्रकारिता का मूल मंत्र किसी व्यक्ति विशेष के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं, बल्कि मुद्दे को सामने रखना और जवाबदेही तय करने के लिए सवाल खड़ा करना रहा है। यही वजह है कि उनके नाम के साथ बेबाक और बेधड़क पत्रकारिता की पहचान जुड़ती गई।

🔴 सम्मानो ने बढ़ाया कद 

संजय चाणक्य की पत्रकारिता और उपलब्धियों को हाल के दिनों में अलग-अलग संस्थाओं ने सम्मानित किया है। उन्हें मिले प्रमुख सम्मानों में मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड फाउंडेशन द्वारा जर्नलिज्म लीडरशिप अवॉर्ड , ट्रूवर्थ संस्था द्वारा ट्रूवर्थ प्रतिभा सम्मान, जीव्रान फाउंडेशन की ओर से भारत रत्न आइकॉनिक एक्सीलेंस अवॉर्ड, ट्रूवर्थ ग्लोबल एक्सीलेंस अवॉर्ड, एमएसएमई संस्था की ओर से आचार्य चाणक्य एक्सीलेंस अवॉर्ड, ट्रूवर्थ यूनिवर्सल अचीवमेंट अवॉर्ड, ट्रूवर्थ भारत सम्मान जैसे सम्मान शामिल हैं। इन सम्मानों की खास बात यह है कि इनमें पत्रकारिता के साथ नेतृत्व, उत्कृष्टता, उपलब्धि और सामाजिक योगदान के अलग-अलग पहलुओं को रेखांकित किया गया है। सम्मानों की यह सूची निश्चित रूप से उनके लिए उपलब्धि है, लेकिन 27 वर्षों की पत्रकारिता के सामने यह सिर्फ एक पड़ाव है। असली उपलब्धि उस भरोसे में है, जो एक पत्रकार वर्षों की लगातार मेहनत से पाठकों के बीच बनाता है।

🔴 28 साल बाद भी कलम की धार कायम

दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर हिन्दुस्तान, अमर उजाला और दूसरे समाचार पत्रों से होते हुए अपने अखबार तक पहुंचा। फिर समाचार एजेंसियों तक विस्तार हुआ। इस दौरान पत्रकारिता की तकनीक बदल गई, खबरों की रफ्तार बदल गई और पाठकों की आदतें बदल गईं, लेकिन संजय चाणक्य की कलम का तेवर नहीं बदला।इसी लंबे सफर और पत्रकारिता में सक्रिय योगदान के लिए उन्हें मिले सम्मानों पर श्रमजीवी पत्रकार यूनियन सहित जनपद, मंडल और प्रदेश के पत्रकारों ने खुशी जताई और बधाई दी। एक पत्रकार जिसने नौकरी से शुरुआत की, गुरु से पत्रकारिता सीखी, कई बड़े समाचार संस्थानों में जिम्मेदारी निभाई और आखिरकार अपना अखबार खड़ा कर दिया। संजय चाणक्य की कहानी किसी एक सम्मान की नहीं, बल्कि उस जिद की कहानी है जिसमें पत्रकारिता को पेशा नहीं, अपनी पहचान बनाने का जरिया बनाया गया।। 


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