🔴रिश्वत, दुष्कर्म और धमकी, पीडिता बनाम सरकारी ताकत का घिनौना खेल
🔵कुर्सी की ताकत, वर्दी की रौब और हवस की लत अफसर पर महिला को बंधक बनाकर दुष्कर्म, रिश्वत और धमकी का सनसनीखेज आरोप
🔴ग्लोबल न्यूज
मिर्जापुर /लखनऊ। सरकारी कुर्सी, वर्दी का रौब और पैसों की ताकत की गठजोड़ ने एक महिला की जिंदगी को नर्क से भी बदतर बना दिया। सीजीएसटी व कस्टम विभाग में सुप्रिटेंडेंट के पद पर तैनात प्रमोद कुमार तिवारी पर एक महिला केबल ऑपरेटर ने रिश्वत व झासा देकर दुष्कर्म, बंधक बनाकर लगातार यौन शोषण, जबरन गर्भपात, जान से मारने की धमकी और झूठे मुकदमों में फंसाने जैसे अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए बताई अपनी आप बीती । यह मामला सिर्फ महिला की पीड़ा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की नाकामी का आईना है, जहां कुर्सी अपराध की ढाल बनकर पीड़िता की आवाज दबाने मे सफल रहा है।
पीड़िता के मुताबिक वर्ष 2022 में मीर्जापुर में सीजीएसटी सुप्रिटेंडेंट रहे प्रमोद कुमार तिवारी ने महिला केबल ऑपरेटर के मात्र 19 हजार रुपये के जीएसटी बकाये को आधार बनाकर एक लाख रुपये से अधिक का नोटिस भेज दिया। महिला ने जब व्यक्तिगत रूप से मिलकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, तो यहीं से दबाव और शोषण की कहानी शुरू हुई।
🔴फोन नंबर लिया, रिश्वत मांगी और होटल बुलाया
आरोप है कि बातचीत के दौरान आरोपी प्रमोद कुमार तिवारी ने महिला का मोबाइल नंबर लिया और निजी बातचीत शुरू कर दी। कुछ ही समय में एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। बदले में रसीद देने और टैक्स कम कराने का झांसा देकर महिला को होटल व गेस्ट हाउस बुलाया।
🔴सत्ता का खुली रौब, बंद कमरे मे जबरन किया मुंह काला
पीड़िता का आरोप है कि गेस्ट हाउस पहुंचते ही आरोपी ने कमरा अंदर से बंद कर दिया और कहा “मैं तुम्हारी मदद कर रहा हूं, मुझे खुश नहीं करोगी क्या?”महिला के विरोध के बावजूद आरोपी प्रमोद ने उसके साथ जबरन मुंह काला किया । इसके बाद उसे धमकाते हुए कहा कि “थाने-चौकी जाने की गलती मत करना, मैं आयुक्त स्तर का अधिकारी हूं, तुम्हारी कोई नहीं सुनेगा।” पीड़िता का दावा है कि इसके बाद वह डर और धमकी के साये में जीने को मजबूर हो गई। आरोपी उसे कभी वाराणसी कभी गोरखपुर और कभी प्रयागराज सहित कई शहरों में बुलाता रहा और इमोशनल ब्लैकमेलिंग व धमकी देकर दुष्कर्म करता रहा। विरोध करने पर महिला के परिवार को खत्म करने की धमकी दी।
🔴 गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात
आरोप है कि लगातार शोषण के दौरान महिला गर्भवती हो गई, जिसके बाद आरोपी सुप्रिटेंडेंट सीजीएसटी प्रमोद कुमार तिवारी ने जबरन गर्भपात कराया। महिला द्वारा बार-बार एक लाख रुपए रिश्वत की रसीद मांगने पर आरोपी टालमटोल करता रहा और कभी नौकरी दिलाने तो कभी मदद के नए झूठे वादे करता रहा।
🔴 एंटी करप्शन ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा
6 दिसंबर 2023 को गोरखपुर–सिद्धार्थनगर ककरहवा बॉर्डर पर पोस्टिंग के दौरान एंटी करप्शन ने सुप्रिटेंडेंट प्रमोद कुमार तिवारी को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी पीड़िता के लगाए गए आरोपों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सुप्रिटेंडेंट प्रमोद तिवारी तकरीबन 6 महीने जेल में रहा। पीड़िता का कहना है कि वह जेल में भी आरोपी से रसीद की मांग को लेकर मिलने गई थी, जहां आरोपी ने बाहर निकलते ही मिलने का भरोसा दिया। लेकिन 23 मई 2023 को जमानत पर बाहर आने के बाद आरोपी ने महिला का नंबर ब्लॉक कर दिया और संपर्क पूरी तरह तोड़ लिया।
🔴आरोपी की पत्नी पर पीडिता को फर्जी मुकदमे मे फसाने का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने शिकायत वापस लेने से इनकार किया, तो पहले उसे रुपयों का लालच दिया गया। मना करने पर आरोपी की पत्नी विभा तिवारी ने धमकी देते हुए कहा “मेरे पास सौ करोड़ रुपये हैं, कोर्ट को जेब में रखती हूं।”पीड़िता का दावा है कि इसके बाद उसे रुपयों के बल पर फर्जी मुकदमे में फंसा दिया गया और लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।
🔴 जांच में आरोप सत्य, मुकदमा दर्ज
पीडिता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने जांच की, जिसमें घटना प्रथम दृष्टया सत्य पाए जाने का दावा किया गया। इसके बाद आरोपी प्रमोद कुमार तिवारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पीड़िता ने अपनी आपबीती अखबारों और समाचार चैनलों को भी बताई है।
🔴14 साल निलंबन, फिर नौकरी मे वापसी, रौब बरकरार
पीडिता का कहना है आरोपी प्रमोद कुमार तिवारी अन्तर्राष्ट्रीय हैमर थ्रोबर खिलाडी है। वह वर्ष 2005 मे कस्टम डिविजन बहराइच मे पोस्टेड थे। उनके उपर वर्ष 2006 मे कानपुर मे एक मामले गंभीर आरोप लगे थे जिसके कारण उन्हे सस्पेंड कर दिया गया था। तकरीबन 14 वर्षों तक निलंबित रहा और वर्ष 2019 में दोबारा सेवा में लौटा। पीड़िता के आरोपों के अनुसार, सेवा में वापसी के बाद भी उसके व्यवहार और कार्यशैली में कानून के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं दिखी।
🔴सिस्टम को कटघरे में खड़ा करने वाला सवाल
क्या सरकारी कुर्सी व जिम्मेदार पदो पर आसीन अधिकारी को अपराध करने का लाइसेंस मिला है? क्या मजबूरी का फायदा उठाकर, झासे मे लेकर किसी महिला के साथ मुंह काला करने वाले अफसर के रहते हुए समाज में महिलाएं के सुरक्षित है? क्या पैसों व पद के आगे एक पीड़िता की सच्चाई दबा दी जाएगी? ऐसे तमाम सवाल है जिसका दबाब हर कोई सुनने के लिए आतुर है, क्योंकि यह मामला सिर्फ एक महिला के सम्मान का नहीं, बल्कि उस न्याय व्यवस्था की परीक्षा है, जो अक्सर वर्दी और कुर्सी के सामने सूरदास बन जाती है।अब देखना दिलचस्प है कि कानून आरोपी प्रमोद तिवारी के रौब और धनबल के आगे झुकती है या पीड़िता को इंसाफ दिलाती है।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य

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