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“नकल कांड '' पर नोटिस का पर्दा, महर्षि वाल्मीकि केन्द्र पर बड़ा खेल

  

प्रतिकात्मक फोटो
🔴मिश्रित सीटिंग की धज्जियां, नोटिस से निपटा मामला

🔴सीटिंग ध्वस्त, वाइस रिकॉर्डिंग ठप—कार्रवाई शून्य

🔵 ग्लोबल न्यूज 

कुशीनगर। जिले में संचालित हो रहे यूपी बोर्ड परीक्षा के दौरान महर्षि वाल्मीकि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पिपरैचा में सामने आए कथित नकल कांड ने शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि यहां मिश्रित सीटिंग व्यवस्था को सुनियोजित ढंग से ध्वस्त किया गया, वाइस रिकॉर्डिंग को निष्प्रभावी कर दिया गया और इमला बोलकर छात्रों को प्रश्नपत्र हल कराए गए। लेकिन इन गंभीर आरोपों के बावजूद न तो केन्द्र व्यवस्थापक पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही केन्द्र को डिबार किया गया, जो अपने आप मे यक्ष प्रश्न है। 

बतादे कि बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि परीक्षा के दौरान मिश्रित सीटिंग व्यवस्था अनिवार्य है, ताकि किसी एक विद्यालय के छात्रों को सामूहिक लाभ न मिल सके। आरोप है कि इस मूल नियम को दरकिनार कर महर्षि वाल्मीकि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ने अपने छात्रों को अलग कमरों में बैठाया गया। इतना ही नहीं, कई कक्षों में वाइस रिकॉर्डिंग व्यवस्था निष्प्रभावी रही, जिससे निगरानी तंत्र कमजोर पड़ गया।

🔴इमला बोलकर नकल का आरोप

महर्षि वाल्मीकि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के वाह्यय केन्द्र व्यवस्थापक रहे विजय यादव व स्टेटिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार द्वारा संयुक्त रूप डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त को दिये गये पत्र में खुलासा किया गया है कि केन्द्र पर वाइस रिकॉर्डिंग के अभाव का फायदा उठाकर छात्रों को इमला बोलकर उत्तर लिखवाए गए। ऐसे में यह न सिर्फ परीक्षा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मेहनती और ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।

🔴कार्रवाई के नाम पर ‘नोटिस’ की कोरमपूर्ति 

शिक्षा विभाग से जुडे विशेषज्ञो की माने तो बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बाद भी केन्द्र को डिबार क्यों नहीं किया गया। विभाग-ए-शहंशाह ने कोरमपूर्ति के तौर पर केन्द्र व्यवस्थापक को नोटिस थमा दिया और मामले का पटाक्षेप कर दिया। शिक्षा जगत में चर्चा है कि क्या इतनी बड़ी अनियमितता पर महज नोटिस पर्याप्त है?मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि प्रकरण को उजागर करने वाले वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक विजय यादव को यह कहकर हटा दिया गया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है इलाज के लिए उन्हें ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया है ऐसे मे सवाल यह उठता है कि जब विजय यादव की तवीयत ठीक नही थी तो फिर उन्हे वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक बनाया क्यो गया? सवाल यह भी उठता है कि जब विजय यादव ने अपने केन्द्र पर हो रहे नकल का खुलासा किया  तभी क्यो उनका तवीयत बिगड गया और उन्हें बोर्ड परीक्षा के जिम्मेदारी से मुक्त होना पडा। जानकारों का कहना है कि यदि अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी,तो पहले केन्द्र को डिबार कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन इसके विपरीत शिकायतकर्ता को ही किनारे कर दिया गया।

🔴सवालों के घेरे में निर्णय

 डीआईओएस पर उठ सवाल पर गौर करे तो केन्द्र को डिबार क्यों नहीं किया गया?वाइस रिकॉर्डिंग निष्प्रभावी करने की जिम्मेदारी किसकी रही?मिश्रित सीटिंग व्यवस्था तोड़ने पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं?शिकायतकर्ता को हटाने का वास्तविक कारण क्या है? ऐसे तमाम सवाल है जो सुरसा की तरह मुंह बाये खडी है जिसका जबाब सिर्फ और सिर्फ डीआईओएस ही दे सकते है।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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