एरियर घोटाले के बाद अब पदोन्नति का खेल! कनोडिया इंटर कॉलेज से ‘ 'फर्जीवाड़े 'की फाइल पहुची डीआईओएस दफ्तर
🔵एरियर घोटाले के आरोपी शिक्षक विरेन्द्र पाण्डेय की अब प्रमोशन पर नजर, विभागीय मिलीभगत के आरोप
🔴 एरियर घोटाले के आरोपी नियम विरुद्ध विनियमितीकरण व चयन वेतनमान का लाभ लेने शिक्षक की अब प्रमोशन पर नजर, विभागीय मिलीभगत का आरोप
🔵 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। श्री गंगा बक्श कनोडिया इंटर कॉलेज कप्तानगंज एक बार फिर विवादों के भंवर में है। सबब यह है कि यह विद्यालय अब पढ़ाई से ज्यादा फर्जीवाड़े, नियमों की धज्जियां उड़ाने और विभागीय सांठगांठ की वजह से चर्चा में है। बिना कार्य किए लाखों रुपये एरियर लेने, विनियमितकरण से पहले चयन वेतनमान का लाभ उठाकर सरकारी खजावा लूटने और बर्खास्तगी के बाद भी नौकरी करने जैसे गंभीर आरोपों से घिरे शिक्षकों का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब एक नया “खेल” शुरू हो गया है, नियम विरुद्ध पदोन्नति का खेल।
सूत्रों के मुताबिक विवादों में घिरे सहायक अध्यापक विरेन्द्र पाण्डेय ने अब पदोन्नति पाने के लिए विभागीय गलियारों में फाइलें दौड़ानी शुरू कर दी हैं। हैरत की बात यह है कि सहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय, देवेन्द्र पाण्डेय और विरेन्द्र पाण्डेय के खिलाफ वित्तीय अनियमितता, सेवा नियमों के उल्लंघन और तथ्य छिपाने जैसे आरोप पहले से लगे है, उन्हीं मे से एक सहायक अध्यापक विरेन्द्र पाण्डेय है जिनको नियम विरुद्ध तरीके से पदोन्नति का लाभ पहुंचाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
🔴 दो साल काम नहीं, फिर भी लाखों का वेतन
शिक्षा विभाग के सूत्र बताते हैं कि श्याम नारायण पाण्डेय, देवेन्द्र पाण्डेय और विरेन्द्र पाण्डेय पर आरोप है कि उन्होंने करीब दो वर्षों तक बिना कार्य किए फर्जी तरीके से लाखों रुपये एरियर के रूप में प्राप्त किए। इतना ही नहीं, विनियमितकरण से पहले ही चयन वेतनमान का लाभ लेकर सरकारी धन की बंदरबांट की है। विभागीय जानकार बताते हैं कि यदि किसी शिक्षक की सेवा नियमित होने से पहले चयन वेतनमान जारी हुआ है तो यह सीधे वित्तीय अनियमितता और शासनादेशों के उल्लंघन का मामला बनता है। सवाल यह है कि आखिर किन अधिकारियों के संरक्षण में यह सब संभव हुआ?
🔵बर्खास्तगी के बाद भी नौकरी
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू सहायक अध्यापक देवेन्द्र पाण्डेय को लेकर सामने आ रहा है। आरोप है कि बर्खास्तगी के बाद भी तथ्य छिपाकर नौकरी जारी रखी गई। सूत्र बताते है कि भ्रष्टाचार के के खिलाफ कार्य करने वाली दिल्ली की एक संगठन इस मामले मे जनहित याचिका दाखिल करने की योजना बना रही है यदि यह आरोप प्रमाणित हो जात हैं तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी अभिलेखों के साथ गंभीर धोखाधड़ी का मामला माना जाएगा। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि पूरे प्रकरण में कई महत्वपूर्ण तथ्य जानबूझकर दबाए गए ताकि संबंधित लोगों को सेवा में बनाए रखा जा सके।
🔴 लोकायुक्त जांच में फंसे DIOS पर फिर उठे सवाल
पूरा मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार पहले से ही संबंधित शिक्षकों के एरियर भुगतान प्रकरण को लेकर लोकायुक्त जांच की जद में बताए जा रहे हैं। ऐसे में यदि विवादित सेवा अभिलेख वाले शिक्षक विरेन्द्र पाण्डेय को नियम विरुद्ध पदोन्नति दी जाती है तो यह जिला विद्यालय निरीक्षक के लिए बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा कर सकता है।शिक्षा विभाग में चर्चा है कि पदोन्नति से पहले सेवा अभिलेख, नियुक्ति की वैधता, दंड प्रविष्टि और वित्तीय स्थिति की जांच अनिवार्य होती है। बावजूद इसके सहायक अध्यापक विरेन्द्र पाण्डेय को पदोन्नति का लाभ पहुंचाने की कोशिश हो रही है तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
🔴“फाइल मैनेजमेंट” के दम पर चल रहा खेल?
शिक्षा विभाग के गलियारों में यह चर्चा भी जोरो पर है कि कुछ विवादित शिक्षकों और कार्यालय के लिपिको को वर्षों से विभागीय संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि गंभीर शिकायतों और जांचों के बावजूद न वसूली हुई, न कार्रवाई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई।अब सवाल यह है कि आखिर किस ताकत के भरोसे बार-बार नियमों को रौंदने की कोशिश की जा रही है? क्या शिक्षा विभाग में शासनादेश सिर्फ दिखावे के लिए रह गए हैं?
🔴शासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ा सवाल
यदि समय रहते शासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो यह प्रकरण आने वाले दिनों में बड़े वित्तीय घोटाले का रूप ले सकता है। क्योंकि जिन शिक्षकों की सेवा और वेतन तक विवादों में हो, उन्हें नियम विरुद्ध पदोन्नति देना कहा तक सही होगा?
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य
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