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स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में ‘मौत का कारोबार’! ग्लैक्सी से मन्नत और फिर मुन्ना पाली तक तबरेज का खेल

  

🔵ग्लैक्सी बंद हुआ तो खुल गया मन्नत, मन्नत पर सवाल उठे तो बन गया मुन्ना पाली क्लिनिक!

🔴नाम बदलता रहा तबरेज, मौत बांटते रहे अस्पताल 

🔵ग्लोबल न्यूज 

कुशीनगर। जिले में स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती और कथित संरक्षण के दम पर अवैध अस्पतालों का ऐसा नेटवर्क खड़ा हो चुका है, जहां इलाज कम और जिंदगी से खिलवाड़ ज्यादा हो रहा है। खिरकिया स्थित मुन्ना पाली क्लिनिक का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर बिना मानक, बिना विशेषज्ञ डॉक्टर और बिना वैध अनुमति के अस्पताल आखिर किसके आशीर्वाद से चल रहे हैं? 

बेहतर इलाज का सपना दिखाकर लोगों की जान जोखिम में डालने वाले मुन्ना पाली क्लिनिक पर प्रशासन ने तब कार्रवाई की, जब एक प्रसूता जिंदगी और मौत के बीच झूलने लगी। पीड़ित परिवार के हंगामे के बाद तहसीलदार और एमवाईसी मौके पर पहुंचे, जहां एलोपैथिक पद्धति में अवैध रूप से संचालित अस्पताल की कई खामियां उजागर हुईं। जांच के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया।लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है। मुन्ना पाली क्लिनिक के संचालक तबरेज आलम पर आरोप है कि वह अवैध अस्पताल संचालन का पुराना खिलाड़ी है। जब किसी अस्पताल में इलाज के नाम पर मौत का मामला सामने आता है तो वह अस्पताल का नाम और ठिकाना बदल देता है, लेकिन “कारोबार” बंद नहीं होता। ग्लैक्सी, मन्नत और अब मुन्ना पाली क्लिनिक, नाम बदलते गए, लेकिन आरोप वही रहे।

सूत्रों के मुताबिक इससे पहले तबरेज खिरकिया-बांसी मार्ग पर मुख्य सड़क किनारे बेसमेंट में “मन्नत हॉस्पिटल” के नाम से अस्पताल चला रहा था। दिसंबर 2024 में सोहरौना गांव निवासी मुन्ना मंसूरी अपनी प्रसव पीड़ा से जूझ रही पत्नी को वहां लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय लापरवाही हुई और नवजात की मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन ने नवजात की मौत को “कुदरत का खेल” बताकर मामला शांत कराने की कोशिश की। लेकिन त्रासदी यहीं नहीं रुकी। तीन दिन बाद प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी तो अस्पताल संचालकों ने उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां महिला ने भी दम तोड़ दिया। जच्चा-बच्चा दोनों की मौत से भड़के परिजन शव लेकर मन्नत हॉस्पिटल पहुंच गए और जमकर हंगामा किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार परिजनों के गुस्से को देखते हुए अस्पताल संचालक ने बिचौलियों के जरिए मामला “मैनेज” करने की कोशिश की और फिर अस्पताल पर ताला जड़ स्टाफ समेत फरार हो गया।बताया जाता है कि इससे पहले पडरौना-खिरकिया मार्ग पर “ग्लैक्सी हॉस्पिटल” के नाम से भी तबरेज का अस्पताल संचालित होता था। स्थानीय लोगों का दावा है कि वहां भी एक प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल बंद कर दिया गया था।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बार-बार नाम बदलकर अस्पताल चलाने वाले इस नेटवर्क पर स्वास्थ्य विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी? अगर समय रहते कार्रवाई हुई होती तो शायद कई परिवार उजड़ने से बच जाते।अब मुन्ना पाली क्लिनिक सील होने के बाद लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी या फिर अवैध अस्पतालों के इस पूरे नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा जायेगा?

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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