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जी हा ! हर दिन मौत को चुनौती देता है फाइटर आकाश

🔴अस्पताल बना दुनिया, दर्द बना साथी, फिर भी जिंदगी से प्यार करता है आकाश

🔵जिसे बीमारी झुका न सकी, उसे लोग आज कहते है फाइटर आकाश 

🔴छह साल से मौत को हर दिन चुनौती दे रहा पडरौना का युवा, दर्द से नहीं टूटी उम्मीद

🔵 ग्लोबल न्यूज 

कुशीनगर। कुछ कहानियां सिर्फ पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। कुछ लोग सिर्फ अपनी जिंदगी नहीं जीते, बल्कि संघर्ष का ऐसा उदाहरण बन जाते हैं, जो दूसरों को जीने की वजह दे जाए। पडरौना के आकाश कुमार गुप्ता की कहानी भी ऐसी ही एक जिंदा मिसाल है, जिसने दर्द को अपनी ताकत बना लिया। आज लोग उसे फाइटर आकाश के नाम से जानते हैं। यह नाम किसी शौक  के लिए नहीं, बल्कि उस लगातार चल रही लड़ाई के कारण मिला है, जो वह पिछले छह वर्षों से जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा  हैं।

बेशक! यह सिर्फ एक बीमार युवक की कहानी नहीं, बल्कि उस जिद की कहानी है जिसने मौत को भी इंतजार करने पर मजबूर कर दिया। छह वर्षों से गंभीर बीमारी अप्लास्टिक एनीमिया से जूझ रहा  आकाश हर दिन दर्द के साथ उठता है, लेकिन हर सुबह जिंदगी से एक नई लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहता है। क्योंकि अप्लास्टिक एनीमिया ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर का बोन मैरो धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है और शरीर में खून बनना नही के बराबर हो जाता है। मरीज को बार-बार ब्लड और प्लेटलेट्स चढ़ाने पड़ते हैं। छोटी सी चोट भी खतरा बन सकती है और मामूली कमजोरी भी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। लेकिन आकाश की लड़ाई सिर्फ बीमारी से नहीं है। उसकी लड़ाई उस दर्द से है जो हर दिन शरीर को तोड़ता है, उन हालातों से है जो इंसान को अंदर से खत्म कर देता हैं, और उन मजबूरियों से है जिनके सामने अक्सर लोग उम्मीद छोड़ देते हैं।बीते छह वर्षों में शायद ही कोई ऐसा महीना रहा हो जब आकाश अस्पतालों से दूर रहा हों। कभी खून की जरूरत, कभी प्लेटलेट्स की कमी, कभी दवाइयों का भारी खर्च और कभी अचानक बिगड़ती तबीयत। जिंदगी मानो अस्पताल और घर के बीच सिमटकर रह गई। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी तकलीफों के बाद भी आकाश के चेहरे पर शिकायत नहीं, बल्कि लड़ने का जज्बा दिखाई देता है।

आकाश कहते हैं “मैंने जिंदगी को बोझ नहीं बनने दिया।दर्द बहुत हुआ, हालात ने कई बार तोड़ा,लेकिन मैंने खुद से कहा कि अभी हारना नहीं है।”आकाश की जिंदगी का संघर्ष केवल अप्लास्टिक एनीमिया तक सीमित नहीं रहा। इससे पहले वह पीलिया, अपेंडिक्स, टीबी, बवासीर और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी गुजर चुके हैं। एक बीमारी खत्म होती, उससे पहले दूसरी चुनौती सामने खड़ी हो जाती।कई बार हालत इतनी खराब हुई कि परिवार की उम्मीदें टूटने लगीं। डॉक्टरों के जवाब, दवाइयों का खर्च और लगातार गिरती सेहत ने पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से झकझोर दिया। लेकिन आकाश हर बार मौत की आंखों में आंखें डालकर खड़ा हो गया। इसी संघर्ष के बीच उनके पिता का निधन भी हो गया। पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। जिस बेटे को खुद सहारे की जरूरत थी, वह परिवार का सहारा बनने लगा। दर्द भीतर था, लेकिन चेहरे पर मुस्कान रखने की कोशिश जारी रही। जिस उम्र में युवा अपने करियर, नौकरी और सपनों की योजनाएं बनाते हैं, उस उम्र में आकाश ने अस्पतालों के बेड, ब्लड बैंक और मेडिकल रिपोर्टों के बीच जिंदगी बिताई। दोस्तों की दुनिया आगे बढ़ती रही, लेकिन उसकी जिंदगी इलाज और संघर्ष में उलझी रही।फिर भी उसने खुद को कभी “कमजोर” नहीं माना। आकाश का कहना हैं“बीमारी ने मेरा शरीर कमजोर किया है,लेकिन मेरे सपनों को नहीं। मैं आज भी जीना चाहता हूं, पढ़ना चाहता हूं,आगे बढ़ना चाहता हूं।”

🔴संघर्ष और प्रेरणा का चेहरा बना आकाश 

आज सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच फाइटर आकाश संघर्ष और प्रेरणा का चेहरा बन चुका हैं। उसकी कहानी उन लोगों के लिए उम्मीद है, जो बीमारी या मुश्किल हालात के कारण जिंदगी से हार मानने लगते हैं।आकाश का मानना हैं कि समाज गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सिर्फ मरीज न समझे। ऐसे लोग हर दिन मानसिक, शारीरिक और आर्थिक युद्ध लड़ते हैं। उन्हें दया नहीं, सहारा और सम्मान चाहिए ।वह यह भी कहता हैं कि अप्लास्टिक एनीमिया  जैसी बीमारी के बारे में समाज में जागरूकता बहुत कम है। लोग इसे सामान्य कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि यह हर दिन जिंदगी को धीरे-धीरे खत्म करने वाली बीमारी है। आज भी जब शरीर जवाब देने लगता है, तब आकाश खुद को आईने के सामने खडा होकर बस यही कहता हैं “अभी लड़ाई बाकी है…” उसकी आंखों में आज भी भविष्य के सपने हैं। वह पढ़ना चाहता हैं, अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता हैं और यह साबित करना चाहता हैं कि जिंदगी सिर्फ सांस लेने का नाम नहीं, बल्कि हर हाल में लड़ते रहने का नाम है। आकाश की कहानी यह प्रेरणा है कि असली ताकत शरीर में नहीं, इंसान की हिम्मत में होती है।जब शरीर खून बनाना बंद कर दे और फिर भी इंसान उम्मीद बनाकर जिंदा रहे, तो वह सिर्फ मरीज नहीं, एक योद्धा बन जाता है।और शायद इसलिए आकाश आज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष की मिसाल हैं। बीमारी और संघर्षों से हार मानने वालो के लिए आकाश का संदेश “जिस शरीर में खून कम बनता हो, वहां हिम्मत खुद बनानी पड़ती है।मैं कई बार टूटा हूं,लेकिन हर बार फिर खड़ा हुआ हूं।क्योंकि मैं हारने के लिए नहीं,लड़ने के लिए पैदा हुआ हूॅं।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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