🔵भू माफियाओं का बढता दुस्साहस : राज परिवार की भूमि पर कागजी डकैती, फर्जी बैनामे से मचा हड़कंप
🔴भूस्वामी को खबर नही और बिक गई जमीन
🔵 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। जनपद के पडरौना तहसील एक बार फिर भू-माफियाओं की कारस्तानी की गवाह बनी है, जहां शातिर दलालो ने राज परिवार की जमीन को निशाना बनाकर कागजों में ही असली भू स्वामी का मालिकाना हक छीन लिया। सबब यह है कि जब राजस्व अभिलेख चीख-चीखकर मालिक का नाम बता रहे हों, इसके बावजूद किसी दुसरे व्यक्ति द्वारा जमीन बेच दी जाए है तो समझ लीजिए कि माफिया राज कायम है। पडरौना में राज परिवार की जमीन पर हुआ फर्जीवाड़ा इस सच्चाई जीती जागती तस्वीर है। यह सुनियोजित फर्जीवाड़ा अब पुलिसिया जांच के घेरे में है, जिसने पूरे राजस्व तंत्र और निबंधन कार्यालय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पडरौना बडा दरबार आनन्द भवन राज परिवार की सदस्य शरद कुमारी देवी ने सदर कोतवाली पुलिस को दी गई तहरीर में जो खुलासा किया है, वह पूरे सरकारी मशीनरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्वास्थ्य खराब होने के कारण लखनऊ में रह रहीं शरद कुमारी देवी की गैरमौजूदगी को भू-माफिया व विचौलियो ने हथियार बनाकर 28 सितंबर 2025 को जमीन हड़पने का खेल खेला। मामला जंगल बेलवा स्थित आराजी संख्या 604, रकबा 5.3140 हेक्टेयर से जुड़ा है। यह वही भूमि है, जो वर्ष 2001 में सक्षम प्राधिकारी के अंतिम सीलिंग आदेश के तहत शरद कुमारी देवी को “चाइस लैंड” के रूप में दी गई थी और आज तक राजस्व रिकॉर्ड में शरद कुमारी देवी के नाम दर्ज है। इसके बावजूद सुरेंद्र यादव और राजेंद्र यादव ने दबंगई और साजिश के दम पर जमीन का हिस्सा मीरा पांडेय, बबीता सिंह और सुनीता सिंह के नाम फर्जी बैनामा करा दिया। इतना ही नहीं, इस गुनाह को वैध दिखाने के लिए झूठी गवाही का गंदा खेल खेला गया। आरोप है कि सतेंद्र यादव, धनंजय पांडेय और पारसनाथ सिंह ने जानबूझकर झूठ बोलकर अपराध को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की। सवाल यह है कि बिना मालिक की मौजूदगी,बिना सहमति, बिना अधिकार के बैनामा कैसे हो गया?मामला सामने आते ही पुलिस ने तहरीर के आधार पर सुरेन्द्र यादव, राजेन्द्र यादव, मीरा पाण्डेय, प्रियंका सिंह, बबीता सिंह, सुनीता सिंह, सत्येंद्र यादव, धनंजय पाण्डेय और पारसनाथ सिंह के खिलाफ धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) 329(3)बीएनएस के तहत फर्जीवाड़ा, कूटरचना, धोखाधड़ी सहित तमाम गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ मुकदमा दर्ज कर लेना काफी है या फिर जमीन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जायेगी? कहना ना होगा कि मामला सिर्फ एक जमीन का नहीं है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही , माफिया तंत्रों की दुस्साहस और कानून की साख की है। ऐसे कहना मुनासिब है कि राज परिवार की जमीन सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम आदमी की संपत्ति की सुरक्षा की क्या गारंटी है? अब देखना दिलचस्प है कि कानून के लंबे हाथ भूमाफियाओं पर भारी पड़ता है या फिर कागजी लुटेरे अपने रसूख के दम पर बच निकलते है?
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य

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