🔵राजापाकड़–कोटवा 33 केवी लाइन गायब, किसने लूटी सरकारी संपत्ति?
🔴करोड़ों के तार-पोल गायब, बिजली विभाग कटघरे में
🔵 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। तकरीबन एक दशक पूर्व जनपद के राजा पाण्डेय बिजली घर से कोटवा बाजार तक दौडाई गयी 33 हजार वोल्टेज की हाई वोल्टेज लाइन मौके पर रहस्यमय तरीके से पूरी तरह गायब है।हैरानी की बात यह है कि महंगे तार और पोल हटाए जाने के बावजूद न तो कोई आधिकारिक आदेश सामने आया, न ही बिजली विभाग ने अब तक स्थिति स्पष्ट की है।चर्चा-ए-सरेआम है कि तत्कालीन जेई बिना किसी उच्चाधिकारी के आदेश पर पोल से तार उतरवाकर बेच दिया और सारा धन खुद ही डकार गये। इस बात में कितनी सच्चाई है यह गहन जांच का विषय है।
बतादे कि राजापाकड़ बिजली घर से कोटवा बाजार तक जब 33 हजार वोल्ट की हाई वोल्टेज विद्युत लाइन दौड़ाई गई थी। उस समय बिजली विभाग द्वारा दावा किया गया था कि इससे क्षेत्र को बेहतर बिजली आपूर्ति मिलेगी। लेकिन हकीकत यह है कि करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति कुछ ही वर्षों बाद हवा हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले पोल लगाये गये फिर फिर 33 हजार वोल्ट विद्युत सप्लाई के लिए तार दौडाई गयी फिर कुछ वर्षों के बाद न कोई सूचना, न कोई आदेश तार उतारे गए फिर पोल उखाड दिये गये जैसे यह किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति हो।
🔴बिना आदेश 33 केवी लाइन हटाना क्या अपराध नहीं?जानकारों का कहना है कि जनता को बेहतर विद्युत आपूर्ति मुहैया कराने के उद्देश्य से दौडायें के 33 हजार वोल्ट के विद्युत लाइन हटाने का क्या मतलब है। क्या इसे हटाने का आदेश उच्चाधिकारियों ने दी थी, किसके आदेश पर 33 हजार विद्युत लाइन वाधित कर तार और पोल हटाए गये? अगर आदेश उपर के अधिकारियों का नही था तो फिर बिना आदेश 33 केवी लाइन हटाना क्या अपराध नहीं है? सवाल मुनासिब है हटाए गए तार-पोल किस स्टोर में जमा हैं? किस स्टॉक रजिस्टर में एंट्री है? और किस अधिकारी ने हस्ताक्षर कर रिसीव किया? जानकार कहते है कि बिजली विभाग के पास इन सवालो का जबाब नही है तो यह मामला सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति की लूट का मामला है और इसकी जबाबदेही बिजली विभाग के जिम्मेदारो को है। सूत्रों का कहना है कि बिजली विभाग के रिकॉर्ड में यह लाइन आज भी स्वीकृत व चालू दिखाई जा रही है।अगर यह सच है, तो सवाल गंभीर है कि क्या फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट के सहारे घोटाले को ढंका जा रहा है? क्या भुगतान की फाइलें आज भी इसी लाइन के नाम पर चल रही हैं?
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य


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