Translate(अनुवाद करें)

डीएम की सर्जिकल स्ट्राइक से बेनकाब हुआ स्वास्थ्य महकमे का काला सच

  

🔴सरकारी आवास में मरीज, कमरे में दवाओं का जखीरा और छापे में घिरा डॉक्टर, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल अब जवाब मांग रहे हैं।

🔴  ग्लोबल न्यूज 

कुशीनगर। सरकारी नौकरी, सरकारी आवास और सरकारी संसाधन के बीच भीतर चल रही थी  निजी प्रैक्टिस की समानांतर व्यवस्था। कुशीनगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को मिली एक गोपनीय सूचना ने मंगलवार को पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त छापेमारी में मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर को सरकारी आवास पर मरीज देखते हुए रंगे हाथो पकडा गया। इस दौरान मौके पर लाखों रुपये की दवाओं का जखीरा भी बरामद हुआ। अब सवाल यह है कि सरकारी सेवा की शर्तों को ताक पर रखकर यह खेल कब से और किसके संरक्षण में चल रहा था?

बेशक! जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की सख्ती ने  स्वास्थ्य विभाग के भीतर चल रहे कथित खेल की परतें उधेड़ दीं।  प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने जिस सरकारी आवास पर दस्तक दी, वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। उपजिलाधिकारी आशुतोष, क्षेत्राधिकारी अजय कुमार सिंह, राजस्व विभाग के योगेन्द्र गुप्ता और औषधि निरीक्षक की टीम ने जब सरकारी आवास पर छापा मारा तो वहां मरीजों की मौजूदगी और उपचार संबंधी गतिविधियां सामने आईं। अधिकारियों को प्रथम दृष्टया यह आशंका हुई कि सरकारी आवास को ही निजी प्रैक्टिस के अड्डे में तब्दील कर दिया गया है।छापेमारी के दौरान मेडिकल कॉलेज कुशीनगर में तैनात डॉ. दीन मुहम्मद मौके पर मिले। अधिकारियों ने तत्काल पूरे परिसर की जांच शुरू कराई। जांच के दौरान भारी मात्रा में दवाएं बरामद हुईं, जिनकी कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। दवाओं की प्रकृति, स्रोत और वैधता की जांच के लिए जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को भी मौके पर बुलाया गया।सूत्रों का कहना है कि संबंधित डॉक्टर के खिलाफ निजी प्रैक्टिस की शिकायतें लंबे समय से प्रशासन तक पहुंच रही थीं, लेकिन इस बार जिलाधिकारी को मिली पुख्ता गोपनीय सूचना ने पूरे मामले को जांच के दायरे में ला दिया। यही वजह रही कि कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई और टीम ने सीधे मौके पर पहुंचकर छापा मारा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी आवास में निजी प्रैक्टिस और दवाओं का भंडारण किया जा रहा था तो इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को क्यों नहीं थी? क्या यह सब कुछ अधिकारियों की नजरों से दूर हो रहा था या फिर किसी स्तर पर आंखें मूंद ली गई थीं?समाचार लिखे जाने तक ड्रग इंस्पेक्टर की टीम बरामद दवाओं की गिनती, सूचीकरण और दस्तावेजों के सत्यापन में जुटी रही। प्रशासनिक अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।डीएम की इस कार्रवाई के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच की आंच केवल एक डॉक्टर तक सीमित रहती है या फिर इसके तार किसी बड़े नेटवर्क और विभागीय लापरवाही तक पहुंचते हैं।

No comments:

Powered by Blogger.