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श्याम नरायण, वीरेंद्र और देवेन्द्र का फर्जीवाड़ा : विनियमितकरण से पूर्व ले रहे है चयन वेतनमान का लाभ

  

🔴फर्जी तरीके से वर्ष 2008 से चयन वेतनमान का लाभ प्राप्त कर लाखो रुपये सरकारी खजाना लूटने का सनसनीखेज मामले का खुलासा 

🔵कप्तानगंज स्थित गंगा बक्श कनोडिया इंटर कालेज के सहायक अध्यापको की कारस्तानी 

🔵 ग्लोबल न्यूज 

कुशीनगर। जिले का कनोडिया इंटरमीडिएट कालेज कप्तानगंज मे तैनात सहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय, विरेन्द्र पाण्डेय व बर्खास्तगी के बाद तथ्य गोपन कर नौकरी कर रहे देवेन्द्र पाण्डेय द्वारा विनियमितकरण से पूर्व फर्जी तरीके से चयन वेतनमान का लाभ प्राप्त कर लाखो रुपये सरकारी खजाना लूटने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। सूत्रो का दावा है कि इन शिक्षको की कारस्तानी का फेहरिस्त बहुत लंबी है यह वही शिक्षक है जिन्होंने जुलाई - 2012 से जून-2014 तक बिना कार्य किये एरियर के रूप मे लाखो रुपये सरकार का चूना लगाया है जिसमे डीआईओएस की भूमिका भी संदिग्ध बतायी जा रही। 

काबिलेगौर है कि गंगा बक्श कनोडिया इंटर कालेज कप्तानगंज के सहायक अध्यापक  श्याम नारायण पाण्डेय, विरेंद्र पाण्डेय व बर्खास्तगी के बाद फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे सहायक अध्यापक देवेन्द्र पाण्डेय ने वर्ष 2018 मे तथ्य गोपन कर बडा खेल किया था। सूत्रो के मुताबिक इन शिक्षको ने तथ्य छुपाकर नियम विरुद्ध तरीके से अपना विनियमितकरण कराया था। सूत्रो बताते है कि  विरेन्द्र पाण्डेय, श्याम नरायण पाण्डेय व देवेन्द्र ने तथ्य गोपन व कूटरचित कर दिनांक 23-4-2018 को संयुक्त शिक्षा निदेशक, सप्तम मण्डल, गोरखपुर से अपनी सेवा नियमित करा लिया,जबकि जुलाई-2012 से मार्च-2014 तक इन शिक्षको का हस्ताक्षर विद्यालय के मूल उपस्थिति पंजिका पर अंकित ही नही है। मतलब यह कि यह सभी शिक्षक दो वर्षो तक अपने शिक्षण कार्य से विरत रहे इन्होंने विद्यालय मे अपनी सेवा नही दी। ऐसे मे सवाल यह उठता है जब सहायक अध्यापक देवेन्द्र पाण्डेय, सहायक अध्यापक विरेंद्र पाण्डेय व सहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय दो वर्ष कार्य ही नही किये और सर्विस कार्यकाल नियमित नही रहा तो फिर इन सभी शिक्षकों का नौकरी स्थायी(विनियमित) कैसे हो गया ? विशेषज्ञों का कहना है कि विनियमितीकरण, शिक्षकों की सेवाओं को नियमित करने की प्रक्रिया है। जानकार बताते है कि विनियमितकरण के लिए शिक्षको का सर्विस कार्यकाल नियमित होना जरूरी है और प्रति माह वेतन आहरण होना चाहिए, जबकि श्याम नरायण पाण्डेय, देवेन्द्र पाण्डेय,विरेन्द्र का न तो सर्विस कार्यकाल नियमित रहा है और न ही इनका नियमित रूप से प्रति माह वेतन आहरण हुआ है। जुलाई-2012 से मार्च- 2014 तक इनका विद्यालय के मूल उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर नही है। सूत्रो ने बताया कि इन शिक्षको ने तथ्य गोपन व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बिना कार्य किये दो वर्ष का वेतन एरियर के रुप मे वर्ष 2025 में प्राप्त किया है। ऐसे मे सवाल उठना मुनासिब है कि वर्ष - 2018 मे यह सभी अध्यापक स्थायी कैसे हो गये?

🔴 वर्ष 2018 में हुआ विनियमितकरण तो फिर साल मे 2008 कैसे हुआ चयन वेतनमान

बेशक! इन शिक्षको के फर्जीवाड़े का फेहरिस्त बहुत लंबी है। सूत्र बताते है कि एक के बाद एक फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाना लूटने का रिकार्ड इन शिक्षको के नाम है। बात चाहे दो वर्ष बिना विद्यालय गये लाखो रुपये एरियर प्राप्त करनेयका हो या कूटरचित कर विनियमितकरण का मामला हो या फिर कूटरचित,फर्जी दस्तावेज  के सहारे तथ्य गोपन कर चयन वेतनमान का लाभ लेकर लाखो रुपये सरकारी खजाना लूटने का हो है। इनके द्वारा फर्जीवाड़ा खूब की गयी है। जानकारों की माने तो एक के बाद एक फर्जीवाड़े को अंजाम देना जघन्य अपराध के श्रेणी में आता है। सूत्र बताते है कि श्याम नरायण पाण्डेय, वीरेंद्र पाण्डेय व देवेन्द्र पाण्डेय ने फर्जीवाड़ा व तथ्य गोपन कर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक कुशीनगर पुष्पा रानी श्रीवास्तव के समक्ष अपनी पत्रावली प्रस्तुत कर वर्ष 2008 में चयन वेतनमान का लाभ प्राप्त किया जबकि बिना विनियमितकरण का चयन वेतनमान का लाभ नही मिल सकता है। विभागीय जानकारो की माने तो सहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय ,वीरेंद्र पाण्डेय व देवेन्द्र पाण्डेय का विनियमितकरण वर्ष 2018 मे हुआ है शासनादेश के मुताबिक इन शिक्षको को वर्ष 2028 में चयन वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए, फिर वर्ष 2008 से यह तीनो शिक्षक चयन वेतनमान का लाभ कैसे प्राप्त कर रहे है ? बताया जाता है फर्जी तरीके से चयन वेतनमान का लाभ उठा रहे इन शिक्षको ने अब तक लाखो लाख रुपये सरकार का चूना लगाया है जिसकी रिकबरी जनहित मे लाजमी होगा।

🔴डीआईओएस कार्यालय मे पदोन्नति की पत्रावली

जानकार कहते है कि जब विनियमितकरण और चयन वेतनमान ही गलत तरीके से हुआ है तो इन शिक्षको का पदोन्नति कैसे हो सकता है? सूत्र बताते है कि श्याम नरायण पाण्डेय और वीरेंद्र पाण्डेय ने एक बार फिर तथ्य गोपन कर अपनी पदोन्नति के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मे आवेदन किया है जिसे संज्ञान मे लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त ने गंगा बक्श कनोडिया इंटर कालेज के प्रबन्ध /प्रधानाचार्य को पत्र जारी कर इन शिक्षको के पदोन्नति संबंधित पत्रावली उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सूत्रो का कहना है कि इतने फर्जीवाड़े के बाद अगर इन शिक्षको का पदोन्नति होता है तो मतलब साफ है डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त और इन शिक्षको के बीच हुई मोटी डिलिंग की हो रही चर्चा  मे कही न कही कुछ सच्चाई है जो जांच का विषय है।

रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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