🔴हजम नही हो रहा है ट्रक मे सिर्फ 360 बोतल की पुलिसिया कहानी
🔵 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। बीते दिनो जिले के पडरौना कोतवाली पुलिस ने बिहार बॉर्डर स्थित बांसी चौकी के पास एक ट्रक से 360 बोतल पंजाब निर्मित अंग्रेजी शराब बरामद कर अंतरराज्यीय तस्करी का खुलासा करने का दावा किया था। लेकिन इस कार्रवाई के बाद यक्ष प्रश्न यह है कि क्या वाकई ट्रक में सिर्फ 360 बोतल थीं, या फिर भरी ट्रक से बाकी माल गायब कर दिया गया? यही वजह है कि बरामदगी की मात्रा और ट्रक के उपयोग के बीच का अंतर पुलिस की कहानी पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
पंजाब से बिहार तक सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने वाला ट्रक सामान्यत: बड़ी खेप ढोता है। ट्रक का भाड़ा, डीजल, टोल टैक्स, ड्राइवर खर्च सब मिलाकर लाखों का खर्च स्वभाविक है। ऐसे में लगभग दो लाख रुपये कीमत की 360 बोतल शराब लेकर इतना लंबा सफर करना आर्थिक दृष्टि से अव्यावहारिक लगता है। जानकारों ककी माने तो तस्करी का धंधा जोखिम और मुनाफे के संतुलन पर चलता है। ऐसे मे सवाल उठना लाज़मी है कि क्या कोई संगठित गिरोह इतनी छोटी खेप के लिए पूरा ट्रक दांव पर लगाएगा?
🔴पुलिसिया कहानी की क्या है जमीनी हकीकत
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी संगठित गिरोह से जुड़े हैं और पंजाब व चंडीगढ़ से शराब लाकर बिहार में ऊंचे दामो पर बेचते थे। लेकिन गिरोह का सरगना कौन है? इसकी जानकारी पुलिस ने खुलासे मे नही किया।
🔴सप्लाई चेन में और कौन शामिल है?
महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि पुलिस के हत्थे चढे दोनो तस्कर ट्रक मे भरकर ले जा रहे शराब बिहार में किसको देने वाले थे? क्या वह सडक के किनारे ट्रक खडा कर शराब बेचने वाले थे?क्या पहले भी इस रूट से खेप गई है? ऐसे तमाम सवाल है जिसका जबाब पुलिस के पास भी नही है। स्थानीय चर्चा में यह भी सवाल उठ रहा है कि कहीं ट्रक में वास्तविक मात्रा पुलिस द्वारा किये गये खुलासे 360 बोतल से अधिक तो नहीं थी? क्योंकि ट्रक में महज 360 बोतल की पुलिसिया कहानी किसी को हजम नही हो रही है। क्या जब्ती सूची पूरी है?क्या बरामदगी की वीडियोग्राफी हुई?क्या स्वतंत्र गवाह मौजूद थे? ऐसे तमाम सवाल मुंह बाये खडे है। सबब यह है कि जब ट्रक की क्षमता और बरामदगी की संख्या में इतना बडा अंतर हो, तो संदेह और सवाल उठना स्वाभाविक है।
🔴जवाबदेही जरूरी
कहना ना होगा कि यह मामला सिर्फ 360 बोतलों का नहीं, बल्कि पुलिसिया कार्रवाई की विश्वसनीयता का है। यदि वास्तव में बड़ी तस्करी पकड़ी गई है तो पूरे नेटवर्क का खुलासा होना चाहिए। और यदि खेप छोटी थी, तो ट्रक के उपयोग का ठोस कारण सामने आना चाहिए।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य

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