🔴लोकायुक्त का शिकंजा: डीआईओएस पर घोटालों की परतें खुलने को तैयार
🔵 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय मे भ्रष्टाचार व घोटालो की आंच अब सीधे राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में पहुंच चुकी है। मजे की बात यह है कि इस बार डीआईओएस के उपर लगे आरोप सिर्फ आरोपो तक सीमित नही है बल्कि अधिकारिक जांच के घेरे में आ गया है। नियमो को ताक पर रखकर, तत्थ गोपन कर फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले शिक्षको को संरक्षण देने, बिना कार्य किये लाखो रुपये का एरियर भुगतान कराने व पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से अकूत संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों से घिरे जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त अब लोकायुक्त के जांच के घेरे में आ गये है जिससे बचना अब डीआईओएस के लिए आसान नही होगा। बताया जाता है कि डीआईओएस के खिलाफ जांच के आदेश के बाद कार्यालय सहित फर्जी कार्यो लिप्त शिक्षको व कर्मचारियों की नींद उड़ गयी है।
सूत्रो के अनुसार लोकायुक्त कार्यालय से जारी पत्र संख्या 68-2026/06, दिनांक 8 अप्रैल 2026 ने जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त की नींद उडा दी है। सबब यह है कि इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कुशीनगर निवासी परिवादी विरेन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत 61 पन्नों के परिवाद और सीडी साक्ष्य के आधार पर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाए। पत्र के मुताबिक जिलाधिकारी कुशीनगर की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की एक त्रिसदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दिया गया है। इस समिति में एक वित्त एवं लेखाधिकारी तथा एक शिक्षा विभाग के अधिकारी को शामिल करने की बात कही गई है, ताकि जांच केवल औपचारिक न होकर वित्तीय और प्रशासनिक दोनों पहलुओं से गहराई तक जांच की जा सके।
सबसे अहम निर्देश यह है कि जांच में परिवादी की सहभागिता सुनिश्चित की करने की बात दोहरायी गयी है मतलब यह कि शिकायतकर्ता भी सीधे जांच प्रक्रिया का हिस्सा होगा। साथ ही साथ साफ शब्दों में यह भी कहा गया है कि पूरी जांच आख्या 30 अप्रैल 2026 तक लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत की जाए।कहना ना होगा कि अब तक जो आरोप फाइलों और चर्चाओं में सीमित थे, वे अब दस्तावेजी जांच और जवाबदेही के दायरे में आ गए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त पर आरोप है कि विभाग में नियमों को ताक पर रखकर फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले शिक्षकों को संरक्षण दिया गया और उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा जिले के कप्तानगंज स्थित कनोडिया इंटरमीडिएट कालेज के सहायक अध्यापक श्याम नरायण पाण्डेय और विरेंद्र पाण्डेय से जुडा एरियर भुगतान कराने व महात्मा गांधी इंटर कॉलेज सखवनिया मे नियम विरुद्ध नियुक्त मृतक आश्रित लिपिक अविनाश गुप्ता का मामला भी चर्चा मे है। आरोप है कि इन शिक्षको द्वारा दो वर्षों तक कार्य न करने के बावजूद करीब दस-दस लाख रुपये का एरियर दिलाया गया, जो सीधे-सीधे वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। मामला यहीं खत्म नहीं होता। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वेतन निर्धारण, सेवा पुस्तिका में संशोधन, नियुक्तियों की वैधता और स्थानांतरण जैसे मामलों में भी कथित तौर पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं। विभाग के भीतर “रेट तय” होने और बिना लेन-देन के फाइल आगे न बढान की चर्चा ने इस पूरे सिस्टम को संदेह के घेरे में ला दिया है। डीआईओएस पर सबसे गंभीर आरोप आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पद का दुरुपयोग कर जिला विद्यालय निरीक्षक श्रवण कुमार गुप्त ने अकूत संपत्ति खड़ी की है, जिसकी जांच अब इस त्रिसदस्यीय समिति के सामने एक बड़ी चुनौती होगी।
अब देखना दिलचस्प होगा कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जांच करने वाली समिति को डीआईओएस सहयोग करते है यह फिर मामले को लीपापोती करने के लिए मैनेज करते है। हालाकि जानकारों का कहना है कि लोकायुक्त के जांच से बचना डीआईओएस के लिए मुश्किल होगा।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य

No comments: