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प्रधान-सचिव का कारनामा : अधूरा काम, पूरा भुगतान का खेल! आरओ प्लांट में धन का बंदरबांट

 


🔵मंशा बताइए सवाल पूछने पर सचिव का चौंकाने वाला जवाब

🔴प्रधान बोले " हम अधिकारियों से बात कर लेंगे" 

🔵  ग्लोबल न्यूज 

कुशीनगर। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 15वें वित्त आयोग के तहत ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशुनपुरा विकास खण्ड के मनीकौरा ग्राम सभा में लगाया जा रहा आरओ प्लांट ग्राम प्रधान व सेक्रटरी के मिलीभगत से भ्रष्टाचार की भेट चढ गया है। बताया जाता कि लगभग 4 लाख 64 हजार रुपये की लागत वाली इस परियोजना में प्रधान व सचिव द्वारा भारी वित्तीय अनियमितता और बंदरबांट की गई है। हैरानी की बात यह है कि कार्य  अभी पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ, लेकिन अब तक 3 लाख 66 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया है जो अपने आप मे सवाल है? 

बतादे के गांवो मे आरओ प्लांट लगाने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को स्वच्छ, सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। ताकि ग्रामीणों को जल जनित बीमारी सहित अन्य रोगो की रोकथाम हो सके। ग्रामसभा मनीकौरा के ग्राम सचिवालय परिसर में जो आरओ प्लांट लगाया गया है, उसके नीचे निर्माण कराये गये चबुतरा में घटिया और दोयम दर्जे की ईंटों का प्रयोग किया गया है। ग्राउंड जीरो पर की गयी पडताल के मुताबिक आरओ प्लांट के नाम पर केवल एक छोटा चबूतरा, लोकल क्वालिटी की टाइल्स, साधारण मशीन और मशीन की सुरक्षा के लिए प्लाई से बना घेरा खड़ा कर दिया गया है। स्थानीय निर्माण कार्यों की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि मौके पर हुए कुल कार्य की वास्तविक लागत डेढ़ लाख रुपये से कम दिखाई देती। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर शेष लाखों रुपये कहां खर्च हुए?

🔴पूरा काम नहीं, फिर भी भुगतान कैसे?

सबसे बड़ा सवाल भुगतान प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो रहा है। नियमों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में किसी भी कार्य का भुगतान तभी किया जाता है जब कार्य पूर्ण हो जाए और उसका तकनीकी सत्यापन हो। इसके लिए जेई, एडीओ पंचायत सहित संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके पर निरीक्षण, माप पुस्तिका (एमबी) तैयार करना, जियो टैगिंग, फोटोग्राफी और गुणवत्ता परीक्षण जैसी प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद ही भुगतान की अनुमति दी जाती है। लेकिन अफसोस मनीकौरा में मामला उल्टा नजर आ रहा है। ग्राम प्रधान और सचिव नियम विरुद्ध व मनमाने तरीके से कार्य शुरू होने से पहले ही 3 लाख 66 हजार रुपये निकालकर धन का बंदरबांट कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो कार्य पूर्ण हुआ और न ही सभी औपचारिकताएं पूरी हुईं, इसके बावजूद लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। इससे ग्राम प्रधान नंदलाल साहनी और सचिव राजकिशोर राय की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।


🔴प्रधान का जवाब बना चर्चा का विषय

जब ग्राम प्रधान नंदलाल साहनी से अधूरे कार्य के बावजूद भारी भुगतान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बेहद लापरवाह और बेअंदाज लहजे अ में कहा “आप लोगों से क्या मतलब? अभी काम पूरा नहीं हुआ है।अधिकारी पूछेंगे तो हम उनसे बात कर लेंगे।” इतना ही नहीं, प्रधान ने यह भी स्वीकार किया कि कार्य पूरा होने से पहले भुगतान किया गया है। उन्होंने इसे “रनिंग पेमेंट” बताते हुए कहा कि बाकी पैसा बाद में मिलेगा। हम अधिकारियों से बात कर लेंगे… पांच बार से प्रधान हैं।”प्रधान का यह बयान गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो सरकारी नियम-कानून नहीं बल्कि व्यक्तिगत रसूख और अधिकारियों से ‘सेटिंग’ के भरोसे योजनाओं का संचालन किया जा रहा हो। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अब सरकारी योजनाओं में गुणवत्ता और प्रक्रिया से ज्यादा महत्व ‘बात कर लेने’ की क्षमता को मिल गया है?

🔴सचिव का निर्लज्ज जवाब बजट से क्या मतलब? 

 मजे की बात यह है कि जब ग्राम सचिव से आरओ प्लांट के कुल बजट और खर्च के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। सचिव ने बडे ही निर्लज्जता से कहा बजट से क्या मतलब? आप अपनी मंशा बताइए।”सचिव यहीं नहीं रुके। उन्होंने दावा किया कि जितना पैसा निकाला गया है उतना काम पूरा हो गया है।जरूरत पड़ेगी तो प्रस्ताव कर बजट बढ़ाकर काम करा दिया जाएगा।सचिव के इस बयान ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।अधूरे निर्माण पर लाखों रुपये का भुगतान और फिर प्रधान और सचिव जैसे जिम्मेदारों के बेलगाम बयान इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि कहीं न कहीं बड़े स्तर पर मिलीभगत का खेल चल रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के विकास के नाम पर सरकारी धन को खुलेआम लूटा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो योजनाएं सिर्फ कागजों में पूरी होंगी और जनता को केवल घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार ही मिलेगा।


🔴प्रधान और सचिव की कारस्तानी पर उठ रहे सवाल

15वें वित्त आयोग की योजनाओं में कार्य पूर्ण हुए बिना भुगतान किस आधार पर किया गया?एमबी (माप पुस्तिका) किसने तैयार की जियो टैगिंग और गुणवत्ता सत्यापन कब हुआ वास्तविक लागत और भुगतान राशि में इतना अंतर क्यों? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ?

🔴कागजों में विकास,जमीन पर सवाल

मनीकौरा का यह आरओ प्लांट अब गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में विकास दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। यदि समय रहते मामले की जांच नहीं हुई तो ग्रामीण योजनाओं पर लोगों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा और प्रधान व सचिव ऐसे ही सरकारी धन का बंदरबांट करते रहेगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस वित्तीय अनियमितता पर जिला प्रशासन व विभाग कार्रवाई कर्ता है या फिर प्रधान कथनानुसार अधिकारियों से बात कर लेगें पर मामला खत्म हो जाता है।

🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य


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