🔴जनगणना की नींव में दरार: लेखपालों की गलती से गांवों का भूगोल ही बदल गया
🔴पडरौना तहसील में HLB सीमांकन का खेल, एक गाँव के मकान दूसरे गाँव में चढ़े, प्रगणक परेशान
🔵 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कवायद मानी जाने वाली राष्ट्रीय जनगणना की तैयारियों के बीच पडरौना तहसील से एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) के सीमांकन में लेखपालों ने ऐसी लापरवाही बरती है कि कई गांवों की सीमाओ का भूगोल ही बदल गया है। नतीजतन एक गांव के मकान दूसरे गांव के एचएलबी में दर्ज कर दिए गए हैं और जनगणना कर्मियों को वास्तविक क्षेत्र तलाशने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार गोपालपुर-धीरपट्ट, हरका घूरमल- सिधुआ, हरकाघूरमल- मोतीलहा,हिरनाहा-सिधवा तथा सुखपुरा-बनवीरपुर जैसे गांवों के एचएलबी में ओवरलैप की शिकायतें सामने आई हैं। इतना ही नहीं, जंगल बनवीरपुर क्षेत्र को भी बसहिया के हिस्से में दर्शाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
🔴बिना मौके पर गए ही कर दिया सीमांकन?
ग्रामीणों और जनगणना कार्य में लगे कर्मियों का आरोप है कि कई स्थानों पर एचएलबी कटान केवल नक्शों और कागजीअभिलेखों के आधार पर कर दिया गया। यदि सीमांकन से पहले वास्तविक स्थल का निरीक्षण किया गया होता तो गांवों की सीमाएं एक-दूसरे में समाहित नही होती। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार लेखपालों ने फील्ड सत्यापन किए बिना ही रिपोर्ट तैयार कर दी? जनगणना कार्य में लगे कर्मियो का कहना है कि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक की वास्तविक सीमा और कागजी सीमा में बड़ा अंतर होने के कारण उन्हें घर-घर सर्वे के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार घंटों तक यह समझने में समय लग जाता है कि संबंधित मकान किस हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में दर्ज है। दूसरी ओर ग्रामीण भी यह जानकर हैरान हैं कि उनका घर जिस गांव में वर्षों से दर्ज है, वह अचानक दूसरे गांव के एचएलबी में कैसे पहुंच गया।
🔴सिर्फ आंकड़ों की नहीं, भविष्य की भी गड़बड़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना केवल जनसंख्या गिनने का कार्य नहीं है। इसी के आधार पर मतदाता सूची, सामाजिक एवं जातीय आंकड़े, पंचायत एवं प्रशासनिक योजनाएं, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी विकास योजनाओं का खाका तैयार किया जाता है। ऐसे में हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) सीमांकन की त्रुटियां भविष्य में प्रशासनिक विवाद, योजनाओं के असंतुलित वितरण और रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकती हैं।
🔴अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में आखिर फील्ड स्तर पर निगरानी कौन कर रहा है? यदि सीमांकन में इतनी बड़ी गड़बड़ियां हो रही हैं तो संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापन और निरीक्षण क्यों नहीं किया गया? ग्रामीणों का आरोप है कि पूरा काम कागजों में दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल अलग है। ऐसे मे बडा सवाल यह भी है कि जब जनगणना की बुनियाद ही गलत सीमांकन पर खड़ी होगी, तो आने वाले वर्षों की सरकारी योजनाओं, आंकड़ों और प्रशासनिक निर्णयों की विश्वसनीयता कितनी सुरक्षित रहेगी? पडरौना तहसील में एचएलबी कटान की यह गड़बड़ी अब केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि पूरे जनगणना तंत्र की कार्यशैली पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल बन गया है।
🔴जांच और कार्रवाई की उठी मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पडरौना तहसील में किए गए एचएलबी कटान की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, सभी ओवरलैप क्षेत्रों का पुनः स्थलीय सत्यापन कराया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार लेखपालों और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य

.jpg)
No comments: