नियम हुए नतमस्तक, रसूख हुआ हावी! एक सचिव के कब्जे में पूरा सहकारिता तंत्र, सहकारिता का 'सुपर सचिव' सात समितियां, तीन संघ और एक ही चेहरा...किसके वरदहस्त से फल-फूल रहा है सचिव का यह साम्राज्य? नियम ताक पर, एक सचिव के पास सात समितियों का कब्जा, तीन संघों की जिम्मेदारी भी उसी झोली में
🔵 ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर।सहकारिता विभाग में इन दिनों एक नाम खासे चर्चा में है। चर्चा इसलिए नहीं कि उन्होंने कोई मिसाल कायम की है, बल्कि इसलिए है कि जिस व्यवस्था में जिम्मेदारियां बांटकर काम कराया जाना चाहिए, वहां एक ही सचिव के हाथों में समितियों और संघों का पूरा साम्राज्य सौंप दिया गया है। सवाल उठ रहा है कि यह प्रशासनिक व्यवस्था है या फिर किसी रसूखदार की मनमानी?
काबिलेगौर है है कि शशि प्रकाश राय, जिनकी मूल तैनाती कोटवा लोहझर समिति में बताई जाती है, वर्तमान में कसया की मैनपुर, नौगावां, कानखोरिया और नरकटिया समितियों के साथ फाजिलनगर की पोखरभिंडा तथा हाटा की ढाढ़ा समिति का भी प्रभार संभाल रहे हैं। इतना ही नहीं, हाटा, नैकाछपरा और अहिरौली संघों की कमान भी उनके हाथ में बताई जा रही है।
🔴क्या सहकारिता विभाग में सचिवों का पड गया है अकाल ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा कौन सा चमत्कार है जो एक ही व्यक्ति को सात समितियों और तीन संघों का संचालन करने योग्य बना देता है? क्या जिले में बाकी सचिव अयोग्य हैं या फिर किसी खास चेहरे पर ही विभाग की मेहरबानी बरस रही है?कहना ना होगा कि सहकारिता विभाग का मूल उद्देश्य किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन जब एक ही व्यक्ति के पास दर्जनों जिम्मेदारियां हों तो किसानों तक सेवाएं पहुंच रही हैं या सिर्फ फाइलों में व्यवस्थाएं दौड़ रही हैं, यह जांच का विषय है।
🔴नियमों की धज्जियां या संरक्षण का खेल?
विभागीय जानकारों का कहना है कि अतिरिक्त प्रभार देने की भी एक सीमा होती है। लेकिन यहां तो सीमाएं ही टूटती नजर आ रही हैं। सवाल यह भी है कि आखिर किन परिस्थितियों में इतने प्रभार एक ही व्यक्ति को सौंपे गए और किस अधिकारी ने इसकी अनुमति दी?यदि नियमों के विपरीत चार्ज दिया गया है तो जिम्मेदार कौन है? और यदि नियमों के तहत दिया गया है तो वह नियम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? इस संबध मे सचिव शशि प्रकाश राय से उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर 8738927464 पर लगातार दो बार काल किया गया घंटी बजती रही किन्तु फोन नही उठा। इसके बाद एआर नीरज कुमार गोंड से बात की गयी तो उन्होनें कहा कि कर्मचारियों की कमी है इस लिए वैकल्पिक तौर पर सचिव शशि प्रकाश को सात समितियों का प्रभार सौपा गया है। यह पूछने पर कि क्या यह शासनादेश के अनुरूप नही है लेकिन पहले चला आ रहा है। एआर से के फोन कटने के बाद शशिप्रकाश राय ने फोन किया और कहा कि दो समितियों के प्रभार उनके पस है बाकी लिपिक के पास है। दोबारा फोन कर पत्रकार को हडकाने का प्रयास किया और कहा कि कसया मे रहते है आकर मिल लिजिए या फिर हम मिल लेगे
🔴कसया बैंक परिसर बना सत्ता का केंद्र?
चर्चा यह भी है कि संबंधित सचिव शशि प्रकाश राय कसया सहकारी बैंक परिसर में कमरा लेकर रहते हैं। ऐसे में विभागीय गलियारों में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या सहकारिता का पूरा तंत्र कुछ चुनिंदा लोगों के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है?सवाल सिर्फ एक सचिव का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जहां जिम्मेदारियों का पहाड़ एक व्यक्ति पर लादकर पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया गया है।अब देखना दिलचस्प है कि सहकारिता विभाग इन सवालों का जवाब देता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों की धूल में सच को दफन करने की कोशिश की जाती है। क्योंकि जब एक सचिव के पास सात समितियां और तीन संघ हों, तो सवाल उठना लाजिमी है कि यह व्यवस्था है या रसूख का साम्राज्य?
🔴 रिपोर्ट - संजय चाणक्य

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