भूख से पहले अपमान परोसा गया: हाटा तहसील की संवेदनहीन तस्वीर
जनगणना ट्रेनिंग में शर्मनाक लापरवाही, शिक्षक हुए आहत
🔵ग्लोबल न्यूज
कुशीनगर। दोपहर का समय, भूख से व्याकुल शिक्षक और सामने कचरे की गाड़ी से उतरते खाने के डिब्बे यह दृश्य किसी बदइंतजामी का नहीं, बल्कि खुलेआम अपमान का प्रतीक है। वजह जिन शिक्षकों के कंधों पर देश के भविष्य को गढ़ने की जिम्मेदारी है, उन्हें इस तरह का “सम्मान” देना न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि जिम्मेदार व प्रशासनिक सोच पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
चौकिए मत जनाब, यह किसी फिल्म का दृश्य या उपन्यास की कहानी नही है, बल्कि जनपद के हाटा तहसील में राष्ट्रीय कार्यक्रम जनगणना को सकुशल संपादित करने के लिए प्रशिक्षण दे रहे शिक्षको की खुलेआम अपमान की जीता जागता तस्वीर है। यहां प्रशिक्षण के नाम पर जो नजारे सामने आया है उसने “व्यवस्था” शब्द को ही मजाक बना दिया। जनगणना को लेकर आयोजित शिक्षकों की ट्रेनिंग उस समय विवादों में घिर गई, जब प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों के लिए दोपहर का भोजन जिस वाहन से लाया गया, वह नगरपालिका की कचरा ढोने वाली गाड़ी निकली। इस घटना ने न केवल शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल भी खोल कर रख दी है।ट्रेनिंग में शामिल शिक्षकों ने जब देखा कि उनका भोजन उसी गाड़ी से उतारा जा रहा है, जिसका उपयोग आमतौर पर कचरा ढोने के लिए किया जाता है, तो उनमें आक्रोश फैल गया। “समाज के निर्माता” कहे जाने वाले शिक्षकों के साथ ऐसा व्यवहार न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह दर्शाता है कि जिम्मेदार अधिकारी ट्रेनिंग दे रहे शिक्षको की भूमिका और सम्मान को लेकर कितने संवेदनहीन हैं।
कचरा लंच की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सवाल सीधा है क्या प्रशासन के पास एक ढंग की गाड़ी तक नहीं है? या फिर उनके नजर मे समाज निर्माता कहे जाने वाले शिक्षको के प्रति तनिक भी सम्मान नही है जो उन्हे इतना “हल्का” समझ लिया गया कि कचरा गाड़ी में खाना रखकर परोसा गया। मामला सिर्फ अपमान तक सीमित नहीं है। यह सीधे-सीधे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। जिस वाहन में सड़ी-गली चीजें ढोई जाती हैं, उसमें भोजन लाना किसी भी मानक से अपराध से कम नहीं। ऐसे में अधिकारी यह बताने की जहमत उठाएंगे कि इस “कचरा लंच” की जिम्मेदारी कौन लेगा?जनगणना जैसे राष्ट्रीय स्तर के काम की तैयारी अगर ऐसे हो रही है, तो फिर आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भरोसा कैसे किया जाए? जब ट्रेनिंग ही कचरे के स्तर पर होगी, तो परिणाम क्या होगा, यह समझना मुश्किल नहीं।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
शिक्षकों ने इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक चूक नहीं, बल्कि उनकी गरिमा और स्वास्थ्य के साथ किया गया गंभीर खिलवाड़ है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। अन्य मामलो की तरह यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा, या फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कर नजीर प्रस्तुत किया जायेगा।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य


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