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बाइक बरामद हुईं , चोर पकडा गया... फिर किसके दबाव में खामोश है नेबुआ नौरंगिया पुलिस?

 

🔵नेपाल में पकड़ा गया बाइक चोर, लेकिन नेबुआ में नहीं खुली कानून की किताब

🔴चोरी का खुलासा या मामला दबाने की कोशिश? नेपाल से बरामदगी के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

🔵  ग्लोबल न्यूज 

कुशीनगर। अगर चोरी की बाइक बरामद हो जाए, चोर पकड़ा जाए और पुलिस खुद नेपाल जाकर उसे लेकर आए, तो आगे की कार्रवाई क्या होगी? सामान्य जवाब होगा आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजना। लेकिन नेबुआ नौरंगिया में कहानी उल्टी दिखाई दे रही है। यहां बाइक भी मिल गई, आरोपी भी मिल गया, मगर पुलिसिया कार्रवाई कहीं रास्ते में गुम हो गई। यही वजह है कि अब पुलिस की भूमिका और नीयत दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।

मामला नेबुआ रायगंज निवासी गोविंद गुप्ता की बाइक चोरी का है। बीते सोमवार की शाम शराब भट्ठी के पास से गोविन्द गुप्ता की बाइक चोरी हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस को सूचना देने के बावजूद अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। इसके बाद परिवार के लोग खुद नेपाल पहुंच गए और नवलपरासी जिले के एक चौराहे पर चोरी की बाइक के साथ एक युवक को दबोचा लिया।चर्चा है कि पकड़े गए युवक ने पूछताछ में अपने एक अन्य साथी का भी नाम बताया। इसके बाद परिजनों ने उसे नेपाल के बेलाटारी थाना पुलिस को सुपुर्द कर दिया। सूचना मिलने पर नेबुआ नौरंगिया थाने के एक दरोगा और एक सिपाही भी नेपाल पहुंचे और आरोपी से पूछताछ की। इतना ही नहीं, आरोपी को नेपाल से भारत लाने का कथित वीडियो भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

🔴 सबूत और आरोपी मिलने के बाद एफआईआर क्यो नही ?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब चोरी की बाइक बरामद हो चुकी है, आरोपी की पहचान हो चुकी है और पुलिस पूछताछ भी कर चुकी है, तब आखिर अब तक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया ? यदि आरोपी निर्दोष था तो उसे पकड़ा क्यों गया और यदि दोषी है तो उसे जेल क्यों नहीं भेजा गया? यही सवाल अब गांव की चौपाल से लेकर बाजार तक गूंज रहा है। लोग इसे पुलिस की गंभीर लापरवाही मान रहे हैं तो कुछ लोग पूरे प्रकरण में किसी "अदृश्य दबाव" की बात कर रहे हैं।


🔴पीड़ित परिवार का आरोप- समझौता करो

मामला और गंभीर तब हो गया जब पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि उन पर समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही है तो यह केवल एक चोरी का मामला नहीं बल्कि न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जाएगा। क्षेत्रवासियों का कहना है कि आम नागरिकों के मामलों में पुलिस तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन यहां बरामदगी और आरोपी पकड़े जाने के बाद भी पुलिसिया कार्रवाई का पहिया रुक जाना कई सवाल खड़ा करता है।

🔴नेपाल पहुंची पुलिस चर्चा में

चर्चा-ए-सरेआम  है कि  नेपाल जाने वाले पुलिसकर्मी कथित तौर पर उच्चाधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना ही पडोसी राष्ट्र नेपाल सीमा में प्रवेश कर गए थे। यदि ऐसा हुआ है तो यह गहन व निष्पक्ष जांच का विषय है। हालाकि इसकी अधिकारी पुष्टि नही हुई है। 

🔴 सवाल महकमा के आला अफसरों से

बेशक! इस मामले ने सिर्फ एक बाइक चोरी की घटना को नहीं, बल्कि पुलिस की कार्य प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबब यह है कि जब बाइक बरामद हो गई तो मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ?जब आरोपी पकड़ा गया तो जेल क्यों नहीं भेजा गया ? यदि आरोपी दोषी नहीं था तो उसे हिरासत में क्यों लिया गया?पीड़ित परिवार समझौते के दबाव की बात क्यों कर रहा है? और सबसे अहम सवाल क्या किसी को बचाने की कोशिश हो रही है?फिलहाल क्षेत्र में चर्चा का विषय है कि "जब बाइक भी मिल गई और चोर भी पकड़ लिया गया, तो फिर मुकदमा और जेल भेजने में आखिर अड़चन क्या है?"

🔴 रिपोर्ट - संजय चाणक्य 

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